राजस्थान में चाइनीज मांझा पूरी तरह बैन: अब खरीदा या बेचा तो होगी 7 साल की जेल, सरकार ने जारी किए सख्त आदेश
नमस्कार में ( NGS ब्रेकिंग न्यूज़ ) आपका स्वागत करता है में टैक्सी ड्राइवर हु ओर में गवर्नमेंट योजना की न्यू गाइडलिन पर ब्लॉग भी बनाता हूं ओर लोगों को प्रेरित करता हूं चलिए में आपको आज जो paryavaran और इंसानों and बेजुबानों को परेशानी होती हैं उस मांजे पर ब्लॉग लाया हु
राजस्थान सरकार ने प्रदेश में बढ़ रहे हादसों को देखते हुए एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। और इस पैसले से त्योहार के दिन कमाई होने वाली पर असर तो पड़ेगा लेकिन ये एक सही पैसला है इसमें ऑनली चाइनीज मांझा ओर प्लास्टिक जैसे पर बैन किया है ऑनली सादा इसको हम दागा या डोर बोलते है उसे इस्तेमाल कर सकते है चाइनीज मांजा घातक साबित ओर सकता हैं इसलिए ये पैसला लिया गया है
पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, अब जो भी व्यक्ति इस प्रतिबंधित धागे का उपयोग, बिक्री या भंडारण करेगा, उसे न केवल भारी जुर्माना भरना होगा, बल्कि जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।
NGT के आदेशों का पालन: क्यों लगा यह कड़ा बैन
यह फैसला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के करीब 9 साल पुराने आदेशों की अनुपालना में लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सिंथेटिक धागा (नायलॉन या प्लास्टिक) और कांच या धातु के बुरादे से लेपित मांझा मानव जीवन, पशु-पक्षियों और पर्यावरण के लिए एक गंभीर खतरा है। पिछले कुछ वर्षों में इस मांझे के कारण गर्दन कटने और पक्षियों के पंख कटने की अनगिनत घटनाएं सामने आई हैं, रोड पर बाइक वाले चलते हैं तो उनके गले में आ जाने से उनके नुकसान होता हैं क्योंकि एक बार मांझा गलती से आ जाता हैं तो बाइक एक साथ रोकना बहुत रिस्की हैं ओर रोकते वक्त बाइक सवार को नुकसान हो जाता हैं इसलिए सरकार ने ये पैसला लिया और गंभीर प्रावधान किया हैं
नियमों के उल्लंघन पर क्या होगी सजा
सरकार ने इस बार सजा के प्रावधानों को इतना सख्त रखा है कि कोई भी नियम तोड़ने से पहले दस बार सोचेगा। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत निम्नलिखित सजाएं तय की गई हैं:
जेल की सजा: सामान्य उल्लंघन पर 5 साल तक की कैद। यदि उल्लंघन लंबे समय तक (1 साल से अधिक) जारी रहता है, तो सजा को 7 साल तक बढ़ाया जा सकता है
भारी जुर्माना: दोषी पाए जाने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
प्रतिदिन का जुर्माना: यदि कोई व्यक्ति सजा मिलने के बाद भी नियम का उल्लंघन जारी रखता है, तो उस पर 5,000 रुपये प्रतिदिन का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा। और अगर तब भी नहीं मानता हैं तो इस जुर्माने को बढ़ाया भी जहां सकता हैं ओर सजा भी लम्बी हो सकती हैं
कौन-कौन से धागे हैं प्रतिबंधित?
सिंथेटिक धागा: नायलॉन या प्लास्टिक से बने धागे।
लेपित मांझा: वे धागे जिन पर कांच, धातु या किसी भी धारदार पदार्थ की परत चढ़ाई गई हो।
चाइना मांझा: बाजार में मिलने वाला वह धागा जिसे आसानी से तोड़ा नहीं जा सकता।
नोट: सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल सादा सूती धागा, जिसमें कोई धारदार या चिपकाने वाला पदार्थ न हो, वही पतंगबाजी के लिए मान्य होगा
प्रशासन की तैयारी: सामूहिक निगरानी की जिम्मेदारी
नियमों को जमीन पर लागू करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस को खुली छूट दी गई है। कलेक्टर और उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) को निर्देश दिए गए हैं कि वे राजस्व, वन और पुलिस विभाग की मदद से छापेमारी करें। इसके अलावा
निगरानी टीम: नगर निकायों के पुलिस अधिकारी और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी मिलकर निगरानी करेंगे।
चेकिंग अभियान: पतंगों की दुकानों और गोदामों की सघन तलाशी ली जाएगी
जनता से अपील: सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी भी है
पतंगबाजी हमारी संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन किसी की जान की कीमत पर मनोरंजन कतई सही नहीं है। चाइनीज मांझा न केवल इंसानों के लिए जानलेवा है, बल्कि आकाश में उड़ने वाले बेजुबान पक्षियों के लिए भी काल बन जाता है। एक छोटा सा धागा किसी हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन सकता है
निष्कर्ष (Conclusion)
राजस्थान सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है। 7 साल की जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना यह संदेश देता है कि अब सरकार किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते, हमारी जिम्मेदारी है कि हम खुद भी सादे धागे का उपयोग करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें
ओर ये सूचना आगे लोगो को देकर प्रेरित करे ताकि किसी का नुकसान ना हो



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