तिलहन और दालों पर MSP की 100% गारंटी: क्या अब 'भारत ऑयल' से मिटेगी महंगाई और सुधरेगी किसानों की हालत?
लेखक परिचय:
नमस्कार, मैं हूँ नानीराम सैनी। पेशे से एक टैक्सी ड्राइवर हूँ, लेकिन मेरा लक्ष्य समाज सेवा है। मैं सड़कों पर घूमते हुए आम आदमी की समस्याओं को करीब से देखता हूँ। इस ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि सरकार की हर योजना और काम की खबर आप तक और हमारे किसान भाइयों तक सही समय पर पहुँचे। पढ़िए आज की खास खबर और अपनी राय कमेंट में जरूर दें
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भारत एक कृषि प्रधान देश है, लेकिन विडंबना देखिए कि आज भी हमें अपनी रसोई के लिए दाल और खाद्य तेल का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है। इस निर्भरता को खत्म करने और भारतीय किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संसद की कृषि समिति ने एक ऐसी सिफारिश की है, जो आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है। समिति ने सुझाव दिया है कि सरकार तिलहन (Oilseeds) और दालों (Pulses) की 100% उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने की गारंटी दे।
1. विदेशों पर निर्भरता: एक गंभीर चुनौती
वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 56% खाद्य तेल और एक बड़ी मात्रा में दालें विदेशों से मंगवाता है। आंकड़ों की मानें तो करीब 21.3 लाख टन दालें हर साल आयात की जाती हैं।
इसका नुकसान क्या है?
विदेशी मुद्रा का नुकसान: तेल और दाल खरीदने में भारत का अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बाहर चला जाता है।
महंगाई की मार: जब वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत में तेल और दालें महंगी हो जाती हैं।
किसानों का घाटा: विदेशी आयात के कारण घरेलू किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल पाता।
2. संसदीय समिति की बड़ी सिफारिशें
संसद में पेश की गई 33वीं रिपोर्ट में 'पीएम-आशा' योजना का दायरा बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। समिति की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
MSP पर 100% खरीद की गारंटी
अभी सरकार गेहूं और धान की तो बड़े पैमाने पर खरीद करती है, लेकिन दालों और तिलहन के मामले में यह केवल 25% तक सीमित है। समिति ने कहा है कि अरहर, उड़द और मसूर जैसी दालों की पूरी फसल सरकार खुद खरीदे। जब किसान को पता होगा कि उसकी पूरी फसल MSP पर बिक जाएगी, तो वह ज्यादा उत्पादन करने के लिए प्रेरित होगा।
'भारत ऑयल' ब्रांड की शुरुआत
जिस तरह सरकार 'भारत दाल' और 'भारत आटा' किफायती दरों पर बेच रही है, उसी तर्ज पर 'भारत ऑयल' ब्रांड शुरू करने का प्रस्ताव है। इससे आम जनता को मिलावट रहित और सस्ता खाद्य तेल मिल सकेगा।
आयात शुल्क (Import Duty) में बदलाव
सस्ते विदेशी तेल से घरेलू किसानों को बचाने के लिए समिति ने 20% सुरक्षा शुल्क (Safeguard Duty) लगाने की वकालत की है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की कीमत 800 डॉलर प्रति टन से नीचे गिरती है, तो यह शुल्क तुरंत लागू होना चाहिए।
3. तकनीकी क्रांति: 'क्रिसपर' और नई बीज किस्में
सिर्फ दाम बढ़ाना काफी नहीं है, पैदावार बढ़ाना भी जरूरी है। समिति ने कृषि वैज्ञानिकों से उन्नत तकनीकों में निवेश करने की मांग की है।
क्रिसपर (CRISPR) तकनीक: ऐसी फसलें तैयार करना जो कीटों और बदलती जलवायु को झेल सकें।
सीड हब: 2030 तक हर जिले में 'सीड हब' बनाने का लक्ष्य रखा गया है ताकि किसानों को उनके घर के पास ही उच्च गुणवत्ता वाले बीज मिल सकें।
पुराने कानून में बदलाव: 1966 के पुराने बीज कानून को बदलकर सख्त सजा वाला नया कानून लाने की सिफारिश की गई है ताकि नकली बीज बेचने वालों पर लगाम लग सके।
4. रिकॉर्ड तोड़ गेहूं उत्पादन का अनुमान
ब्लॉग में यह बताना भी जरूरी है कि इस साल देश में गेहूं की पैदावार रिकॉर्ड स्तर पर रहने वाली है। फ्लोर मिलर्स फेडरेशन के अनुसार, इस साल 11.4 करोड़ टन गेहूं उत्पादन की उम्मीद है। हालांकि, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने कुछ चिंताएं बढ़ाई हैं, लेकिन कुल मिलाकर अनाज की उपलब्धता भरपूर रहेगी।
5. महिला किसानों के लिए विशेष लाभ
एक बहुत ही महत्वपूर्ण सिफारिश यह की गई है कि जीएम (GM) फूड की लेबलिंग अनिवार्य हो और सरकारी योजनाओं का 40% लाभ महिला किसानों को दिया जाए। यह ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम होगा।
6. क्या होगा इस बदलाव का असर? (निष्कर्ष)
अगर सरकार इन सिफारिशों को लागू करती है, तो इसके तीन बड़े फायदे होंगे:
किसानों की आय: 100% खरीद की गारंटी से किसानों की आय दोगुनी होने का सपना सच हो सकता है।
आत्मनिर्भर भारत: खाद्य तेल के मामले में हमारी विदेशों पर निर्भरता खत्म होगी।
आम उपभोक्ता को राहत: 'भारत ऑयल' के जरिए मध्यम वर्गीय परिवारों को महंगाई से छुटकारा मिलेगा।
निष्कर्ष के तौर पर, यह केवल एक सिफारिश नहीं बल्कि एक विजन है। खेती को लाभदायक व्यवसाय बनाने और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है।

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