पीएम रिसर्च चेयर स्कीम 2026: क्या है यह योजना और कैसे करें ऑनलाइन आवेदन?

आज के समय में जब हम भारत के विकास की बात करते हैं, तो सबसे बड़ी चुनौती यह सामने आती है कि देश के बेहतरीन वैज्ञानिक, इंजीनियर्स और शोधकर्ता (Researchers) उच्च शिक्षा और बेहतर पैकेजों के लिए विदेशों का रुख कर लेते हैं। इसे तकनीकी भाषा में 'ब्रेन ड्रेन' (Brain Drain) कहा जाता है।


इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य विदेशों में कार्यरत भारतीय मूल के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और विभिन्न उद्योगों में काम कर रहे पेशेवरों को वापस भारत से जोड़ना है। इस योजना के माध्यम से सरकार देश में शोध के स्तर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाना चाहती है। आइए इस लेख में हम इस योजना से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जैसे— पात्रता (Eligibility), मिलने वाले लाभ, वित्तीय सहायता और आवेदन प्रक्रिया को विस्तार से समझते हैं। क्या है प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर (PMRC) योजना

चूंकि यह योजना बहुत बड़ी है और इसमें ₹4 करोड़ से लेकर ₹14 करोड़ तक की रिसर्च ग्रांट दी जा रही है, इसलिए आवेदकों के मन में इसकी योग्यता और शर्तों को लेकर बहुत से सवाल हैं। इस लेख में हम किसी समाचार की तरह बात नहीं करेंगे, बल्कि एक 'चेकलिस्ट' के ज़रिए यह समझेंगे कि कौन इस योजना के लिए पात्र (Eligible) है और कौन नहीं।




सरकार इन्हें भारत के शीर्ष संस्थानों (जैसे IITs और IISc) में वापस आने और अपने स्वतंत्र रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए आमंत्रित कर रही है। इसके बदले में सरकार इन्हें वह सब कुछ दे रही है जो इन्हें विदेशों में मिलता है— भारी-भरकम बजट, वर्ल्ड-क्लास लैब्स और पूरी आजादी।

1. योजना की रीढ़: 3 मुख्य पिलर्स (Structure)

इस पूरी योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने एक बेहतरीन थ्री-टियर सिस्टम तैयार किया है:

°  लीड इंस्टीट्यूशंस (Lead Institutions): देश के 7 सबसे मजबूत और प्रतिष्ठित संस्थान इसके क्रियान्वयन को संभाल रहे हैं। इनमें IIT दिल्ली, IIT बॉम्बे, IIT मद्रास, IIT कानपुर, IIT हैदराबाद, IIT धनबाद और IISc बेंगलुरु शामिल हैं।

° होस्ट इंस्टीट्यूशंस (Host Institutions): देश के टॉप 100 NIRF रैंकिंग वाले इंजीनियरिंग कॉलेज या टॉप 50 रिसर्च सेंटर्स (जैसे CSIR, ICMR लैब्स) जहाँ ये वैज्ञानिक असल में रहकर अपना काम करेंगे।

° पीएमआरसी फेलो (PMRC Fellows): विदेशों से चुनकर आने वाले वो चुनिंदा वैज्ञानिक जिन्हें देश की कमान सौंपी जाएगी।

2.   13 रणनीतिक क्षेत्र: जहाँ भारत को है सबसे ज़्यादा ज़रूरत


सरकार हर किसी क्षेत्र में यह ग्रांट नहीं दे रही है। इसके लिए केवल उन्हीं 13 क्षेत्रों को चुना गया है जो भविष्य की तकनीक और भारत की सुरक्षा/अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी हैं:

° भविष्य की तकनीक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एडवांस्ड कंप्यूटिंग, क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स।

° सुरक्षा और संचार: साइबर सुरक्षा, 6G जैसी अगली पीढ़ी की संचार तकनीक, स्पेस टेक और डिफेंस रिसर्च।

° सस्टेनेबिलिटी: क्लीन एनर्जी, क्लाइमेट चेंज, उन्नत सामग्री (Advanced Materials) और परमाणु ऊर्जा।

° हेल्थ और लाइफ: बायोटेक्नोलॉजी, एडवांस्ड हेल्थकेयर, एग्री-टेक और ब्लू इकोनॉमी (समुद्री अर्थव्यवस्था)।


3.  फेलोशिप की श्रेणियां और पात्रता (Eligibility & Tracks)

इस योजना का हिस्सा बनने के लिए आवेदक के पास संबंधित क्षेत्र में पीएचडी (PhD) या उसके समकक्ष उच्च डिग्री होनी अनिवार्य है। साथ ही उनका विदेशों की किसी बड़ी लैब या इंडस्ट्री में एक्टिव होना ज़रूरी है। अनुभव के आधार पर सरकार ने इसे तीन ट्रैक्स में बांटा है:

° यंग रिसर्च फेलो (YRF): करियर के शुरुआती दौर वाले प्रतिभावान युवाओं के लिए।


° सीनियर रिसर्च फेलो (SRF): उन लोगों के लिए जिनके पास रिसर्च का अच्छा अनुभव और पेटेंट्स हैं।

° रिसर्च चेयर (RC): यह सबसे बड़ा पद है। इसके लिए उम्मीदवार के पास पीएचडी के बाद कम से कम 10 साल का लीडरशिप और बेहतरीन इनोवेशन का अनुभव होना चाहिए।


4. बजट और वित्तीय सहायता: क्यों यह योजना गेम-चेन्जर है?

एडसेंस के लिहाज से यह सेक्शन सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि लोग वित्तीय आंकड़ों को बहुत ध्यान से पढ़ते हैं। बजट 2026-27 में सरकार ने इस योजना के लिए ₹200 करोड़ का शुरुआती प्रावधान किया है। इसके तहत मिलने वाले लाभ निम्नलिखित हैं:


° करोड़ों की एकमुश्त रिसर्च ग्रांट: प्रोजेक्ट के स्तर के अनुसार रिसर्च चेयर (RC) को ₹14 करोड़ तक, सीनियर रिसर्च फेलो को ₹6.5 करोड़ और यंग रिसर्च फेलो को ₹4 करोड़ तक का फंड दिया जाएगा।

° अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का एक्सेस: इन वैज्ञानिकों को भारत की सबसे एडवांस्ड लैब्स में काम करने की पूरी छूट होगी।


° अतिरिक्त भत्ते: इसमें आकर्षक मासिक फेलोशिप के साथ-साथ रहने के लिए आवास भत्ता, मेडिकल और विदेशों से भारत शिफ्ट होने के लिए विशेष 'रीलोकेशन असिस्टेंस' भी दी जाएगी।


5. ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Guide)

यदि कोई योग्य उम्मीदवार इसके लिए आवेदन करना चाहता है, तो प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है:

° शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक PMRC ऑनलाइन पोर्टल पर जाएं।

° अपना नया रजिस्ट्रेशन करें और क्रेडेंशियल्स जेनरेट करें।

° अपनी शैक्षणिक योग्यता और वर्तमान में विदेश में किए जा रहे काम का पूरा ब्यौरा भरें।

° महत्वपूर्ण कदम: अपना एक विस्तृत 'रिसर्च प्रपोजल' (Research Proposal) अपलोड करें, जिसमें यह साफ हो कि आपके प्रोजेक्ट से भारत को क्या फायदा होगा।

° पासपोर्ट/OCI कार्ड और डिग्री सर्टिफिकेट्स अपलोड करके फॉर्म सबमिट करें।


📅 महत्वपूर्ण तिथि: इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2026 तय की गई है। चयन का जिम्मा भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (Principal Scientific Adviser) की अध्यक्षता वाली एक सशक्त समिति के पास होगा।


हमारा नज़रिया (Conclusion & Opinion)


प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर योजना 2026 महज़ एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह भारत के 'ब्रेन गेन' की दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है। करोड़ों की ग्रांट और IITs जैसे संस्थानों का इंफ्रास्ट्रक्चर निश्चित रूप से वैश्विक स्तर के वैज्ञानिकों को भारत की ओर आकर्षित करेगा। यदि भारत इन वैज्ञानिकों को एक बेहतर और बिना किसी लालफीताशाही (Bureaucracy) वाला माहौल देने में सफल रहा, तो आने वाले सालों में भारत खुद तकनीक का निर्यात करने वाला देश बन जाएगा।

टिप्पणियाँ