CTET और SET परीक्षा का टकराव: लाखों अभ्यर्थियों के करियर पर संकट, जानिए पूरा मामला
शिक्षक बनने का सपना देखने वाले और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए एक बेहद गंभीर समस्या सामने आई है। हालिया खबरों के अनुसार, 6 सितंबर को होने वाली दो प्रमुख परीक्षाओं—CTET (केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा) और SET (राज्य पात्रता परीक्षा)—की तारीखें आपस में टकरा गई हैं। इस स्थिति ने उन हजारों अभ्यर्थियों को असमंजस में डाल दिया है जो इन दोनों परीक्षाओं में शामिल होना चाहते थे।
क्या है पूरा मामला?
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित की जाने वाली CTET परीक्षा देशभर में शिक्षक बनने के लिए एक अनिवार्य पात्रता परीक्षा है। वहीं, दूसरी ओर वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) द्वारा आयोजित SET परीक्षा राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) बनने के लिए जरूरी है।
जब ये दोनों ही परीक्षाएं एक ही दिन यानी 6 सितंबर को निर्धारित कर दी गईं, तो उन अभ्यर्थियों के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है जो पात्रता और करियर की राह में इन दोनों ही परीक्षाओं को महत्वपूर्ण मानते हैं। एक ही दिन परीक्षा होने के कारण अभ्यर्थी अब किसी एक ही परीक्षा को चुनने के लिए मजबूर हैं, जिससे उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिरने का डर सता रहा है।
अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों की मांग
राजस्थान युवा बेरोजगार महासंघ के अध्यक्ष राधे मीणा ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि पात्रता परीक्षाओं का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अधिक अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए, लेकिन जब महत्वपूर्ण परीक्षाएं एक ही दिन आयोजित होती हैं, तो इसका उल्टा प्रभाव पड़ता है। योग्य अभ्यर्थी एक अवसर से वंचित हो जाते हैं।
इसी क्रम में, बेरोजगार नेता रवींद्र चौधरी ने भी अपनी राय रखते हुए कहा कि CTET की तारीख पहले घोषित हो गई थी, जबकि SET की तारीख बाद में आई। इस विसंगति को देखते हुए मांग उठ रही है कि VMOU को SET परीक्षा की तारीख पर फिर से विचार करना चाहिए ताकि अभ्यर्थियों को नुकसान न हो।
क्यों महत्वपूर्ण हैं ये परीक्षाएं?
शिक्षक भर्ती और उच्च शिक्षा में नियुक्तियां हर साल नियमित रूप से नहीं निकलती हैं। ऐसे में अभ्यर्थी महीनों पहले से इन परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर देते हैं।
CTET का महत्व: यह केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों और अन्य केंद्रीय संस्थानों में शिक्षक बनने का मार्ग प्रशस्त करता है।
SET का महत्व: यह राज्य स्तर पर कॉलेज और विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए एक आवश्यक पात्रता है।
अभ्यर्थियों का तर्क है कि परीक्षाओं की तिथियां तय करते समय संबंधित बोर्ड और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय (coordination) होना चाहिए था। परीक्षा की तारीखों का टकराव न केवल अभ्यर्थियों की मेहनत को प्रभावित करता है, बल्कि उनके भविष्य और करियर विकल्पों को भी सीमित कर देता है।
आवेदन प्रक्रिया की स्थिति
परीक्षाओं की प्रक्रिया की बात करें, तो SET के लिए आवेदन प्रक्रिया वीएमओयू (VMOU) द्वारा शुरू की जा चुकी है, जिसके लिए अभ्यर्थी रिक्रूटमेंट पोर्टल और एसएसओ (SSO) पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। वहीं, CTET के लिए आवेदन प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। अब 6 सितंबर को होने वाली CTET परीक्षा दो पारियों में संपन्न होगी।
क्या हो सकता है समाधान?
अभ्यर्थियों की मांग एकदम स्पष्ट है—परीक्षाओं की तारीख में बदलाव। यदि संबंधित विभाग इस ओर ध्यान नहीं देते हैं, तो इसका सीधा असर उन मेधावी छात्रों पर पड़ेगा जो शिक्षण के क्षेत्र में अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहते हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए किसी एक परीक्षा की तिथि में बदलाव करे ताकि किसी भी छात्र को अपने करियर के दो महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से किसी एक को छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े।
निष्कर्ष:
शिक्षा तंत्र में इस तरह के प्रशासनिक समन्वय का अभाव छात्रों के लिए मानसिक और आर्थिक दबाव का कारण बनता है। यह आवश्यक है कि संबंधित संस्थाएं आपस में संवाद करें और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखें। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन इस पर कोई ठोस निर्णय लेता है या अभ्यर्थियों को एक कठिन चुनाव के लिए तैयार रहना होगा।
क्या आप भी इन दोनों परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं।



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