अमुल की राजस्थान में नई एंट्री: मल्टी परपज विलेज सोसाइटी से 24 डेयरी संघों परl क्या पड़ेगा असर? जानिए पूरी खबर

   नमस्कार दोस्तों, मैं आपका टैक्स ड्राइवर आज मैं ऐसी खबर लाया हु कि राजस्थान के पशुपालकों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आज एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। देश के सबसे बड़े डेयरी ब्रांड 'अमुल' (Amul) की अब राजस्थान में एक नए रूप में एंट्री होने जा रही है। केंद्र सरकार के सहयोग से राजस्थान में 'मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड' का गठन किया जा रहा है। इस नए फैसले से राजस्थान के स्थानीय डेयरी संघों के बीच खलबली मच गई है। आइए बिल्कुल आसान शब्दों में समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और इससे हमारे गांवों के पशुपालकों पर क्या असर पड़ेगा। 

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1.  राजस्थान में सहकारी समिति का नया ढांचा जानिए क्या है ये

सरकार के द्वारा न्यूज़ दैनिक भास्कर से यह पता चला है कि अब देश की सबसे बड़ी डेयरी मल्टीस्टेज समिति राजस्थान में 24 जिला मैं ओपन करने की तैयारी में लग रही हैं और अपना नेटवर्क बिछाने में लगी हुई है और गांव गांव मल्टी परपज समिति ( सोसाइटी ) बनाई जाएगी जो लोकल गांव में डेयरी होती हैं वो अब सीधे अमूल को अपना दूध सप्लाई कर सकती है! 

2.  स्थानीय डेयरी संघों का अस्तित्व  क्यों है खतरे में जानिए मामला

 राजस्थान में गांव-गांव मे स्थानीय डेयरी संघों का बहुत बड़ा नेटवर्क फैला हुआ है ओर इनमे ये 24 जिले आते है ओर अमूल समिति इन 24 जिला में ही अपना ढांचा तैयार करने में लगी हुई हैं इसे इन सभी संघों पर जो पहले से ही मौजूद हैं इन पर बुरा असर पड़ेगा क्योंकि लोग अब अमूल को ही डायरेक्ट सप्लाई करेंगे तो इनसे बाजार में असर देखने को मिलेगा और अमूल जैसी बड़ी सी कंपनी के उतरने से ये छोटे संग मुकाबला नहीं कर पाएगा ! 

3 . राजस्थान में सहकारी डेयरी के मुख्य आंकड़े (एक नजर में):

कुल जिला संघ: 24 जिला संघ वर्तमान में कार्यरत हैं।

दैनिक दूध संकलन: राजस्थान में रोज़ाना करीब 45 लाख लीटर दूध का संकलन होता है।

अमुल का नेटवर्क: अमुल ब्रांड को चलाने वाली संस्था गुजरात कॉपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन का सालाना टर्नओवर 90 हजार करोड़ रुपए से भी ज़्यादा है।

4 . राजस्थान में ये आने से क्या क्या सुविधा होगा जिसे किसान इनकी तरफ झुकाव होगा। 

राजस्थान में डेयरी और सहकारिता से जुड़ी यह नई व्यवस्था आने वाले समय में पशुपालकों के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकती है, क्योंकि मुकाबला बढ़ने से दूध उत्पादकों को अपने दूध की सही और ज़्यादा कीमत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, स्थानीय डेयरी संघों को अपनी साख बचाने के लिए अब अपनी व्यवस्था में सुधार करना होगा। और इसका उद्वेश्य राजस्थान के अलावा 20 राज्य में ओपन करने का जिसे ये लगता है कि ये पशुओं को बेहतर चिकित्सीय सुविधा और बेहतर पोषण सुविधाएं एंड आधुनिक तरीकों का फायदा मिलेगा 


दोस्तों, राजस्थान में डेयरी और सहकारिता से जुड़ी यह नई व्यवस्था आने वाले समय में पशुपालकों की किस्मत बदल सकती है। इस योजना और भर्ती से जुड़ी आधिकारिक घोषणाओं के लिए आप राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) की ऑफिशियल वेबसाइट पर नज़र रख सकते हैं। इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें नीचे कमेंट करके ज़रूर बताएं।"


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