बागवानी फसल को लेकर अब सरकार ने बड़े नियम लाई हैं जिसे अब किसानों को फायदा होगा जानिए पूरी कहानी।

 नमस्कार दोस्तों भारत एक कृषि प्रधान देश है इसी लिए सरकार अब बागवानी किसानों के लिए एक बहुत ही सही फैसला लिया गया है जिसे इस खेती को आगे बढ़ाया जहां सके पारंपरिक फसलों से हटकर अब देश के किसान बागवानी  और संरक्षित खेती  की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।

अगर आप भी कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं या एक किसान हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि सरकार देश में बागवानी के विकास के लिए किस स्तर पर काम कर रही है। हाल ही में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान देश में बागवानी के समग्र विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। आइए, इसे विस्तार से समझते हैं कि सरकार की कौन-सी योजनाएं और पहलें किसानों की तकदीर बदल रही हैं।

Agricultural training and excellence center for horticulture farmers in India
 बेस्ट किनाशक यंत्र 
https://link.amazon/B06iRC4K7Click

BonKaso 5000mAh Mini Power Bank 15W 

https://link.amazon/B07UxXewwClick

MIDH scheme horticulture



बागवानी विकास मिशन (MIDH): एक मजबूत आधार। 

देश में बागवानी के चहुंमुखी विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा समेकित बागवानी विकास मिशन (MIDH) नामक एक महत्वपूर्ण केंद्र प्रायोजित योजना चलाई जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बागवानी क्षेत्र की पूरी श्रृंखला (उत्पादन से लेकर बाजार तक) को मजबूत करना है।

एमआईडीएच के तहत किसानों को केवल वित्तीय मदद ही नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें तकनीकी और संस्थागत सहायता भी मुहैया कराई जाती है। इस मिशन के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि देश का हर किसान आधुनिक तकनीकों से जुड़ सके और अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सके।

तकनीकी और संस्थागत सहायता का विस्तृत नेटवर्क। 

Polyhouse farming subsidy

आज के समय में आधुनिक खेती बिना सटीक तकनीकी ज्ञान के संभव नहीं है। सरकार ने इसके लिए एक बहुत ही मजबूत और व्यापक संस्थागत ढांचा तैयार किया है, जो देश के कोने-कोने तक किसानों की मदद कर रहा है। इसमें निम्नलिखित प्रमुख संस्थान और एजेंसियां शामिल हैं। 

राज्य बागवानी मिशन (SHM): जो राज्य स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन की देखरेख करता है।

तकनीकी सहायता समूह (TSG): जो किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देते हैं।

सटीक कृषि विकास केंद्र (PFDC): आधुनिक और सटीक कृषि तकनीकों पर शोध और प्रसार का काम करते हैं।

उत्कृष्टता केंद्र (CoE): जो किसानों के लिए लाइव प्रदर्शन और प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र हैं।

आईसीएआर (ICAR) संस्थान और राज्य कृषि विश्वविद्यालय (SAU): वैज्ञानिक अनुसंधान और उन्नत बीजों/पौधों के विकास में लगे हुए हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र (KVK): जो सीधे ग्रामीण स्तर पर किसानों तक पहुंचकर उन्हें नई कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण देते हैं।

National Horticulture Board


इन सभी संस्थानों के जरिए किसानों को उनकी खेती से जुड़ी हर छोटी-बड़ी समस्या का वैज्ञानिक समाधान आसानी से मिल जाता है।

भारत-इजरायल और भारत-डच सहयोग से बने 61 उत्कृष्टता केंद्र। 

संरक्षित खेती (जैसे पॉलीहाउस या शेड नेट के अंदर खेती) को बढ़ावा देने के लिए देश में बेहतरीन कदम उठाए गए हैं। एमआईडीएच के अंतर्गत भारत-इजरायल सहयोग और भारत-डच सहयोग के साथ-साथ देश के अपने अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से कुल 61 फसल-विशिष्ट उत्कृष्टता केंद्र (CoE) स्थापित किए गए हैं।

ये उत्कृष्टता केंद्र दो बड़े काम करते हैं। 

Farmers working inside a modern protected cultivation polyhouse under government Horticulture scheme


1.  ये किसानों के लिए प्रदर्शनी और प्रशिक्षण केंद्र के रूप में काम करते हैं, जहां किसान जाकर खुद आधुनिक तकनीक को देख और सीख सकते हैं।


2.   ये संरक्षित खेती के लिए विशिष्ट रोपण सामग्री और उत्तम गुणवत्ता वाले सब्जी के पौधों के मुख्य स्रोत के रूप में कार्य करते हैं, जिससे किसानों को बेहतरीन पैदावार मिलती है।

संरक्षित खेती के लिए वित्तीय और तकनीकी मदद। 

सामान्य खुले खेतों की तुलना में पॉलीहाउस या शेडनेट हाउस जैसी संरक्षित प्रणालियों में फसलें मौसम की मार से सुरक्षित रहती हैं और पैदावार भी बंपर होती है। इस दिशा में सरकार ने कई बड़े प्रावधान किए हैं 


संरचनाओं का निर्माण: किसानों को पॉली हाउस, शेड नेट हाउस, प्लास्टिक या नॉन-वॉवन क्लॉथ टनल्स, और वॉक-इन टनल्स जैसी आधुनिक संरचनाएं बनाने के लिए सीधे तौर पर वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जाती है।


अपने घर वाले के लिए मोबाइल ले 
https://link.amazon/B07epGChJClick

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की भूमिका: एनएचबी के माध्यम से वाणिज्यिक पैमाने पर (कमर्शियल लेवल पर) संरक्षित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत एकीकृत वाणिज्यिक बागवानी उत्पादन और प्रसंस्करण परियोजनाएं स्थापित की जाती हैं, जिसमें रोपण सामग्री, उच्च गुणवत्ता वाले पौधे, सिंचाई प्रणाली, आधुनिक उर्वरक और कृषि यंत्रीकरण (मशीनीकरण) जैसे सभी जरूरी घटक शामिल होते हैं।

स्वच्छ पौध कार्यक्रम और क्लस्टर विकास: एनएचबी के स्वच्छ पौध कार्यक्रम और बागवानी क्लस्टर विकास कार्यक्रम जैसे विशेष अभियान देश में बागवानी की तस्वीर को तेजी से बदल रहे हैं।

क्षमता निर्माण और कौशल विकास। 

किसी भी योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसका लाभ उठाने वाले लोग कितने कुशल हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, एमआईडीएच के मानव संसाधन विकास (HRD) घटक के अंतर्गत किसानों और मैदानी स्तर पर काम करने वाले फील्ड कार्यकर्ताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

इसके तहत किसानों को समय-समय पर आधुनिक कृषि प्रणालियों, कीट प्रबंधन, फसल तुड़ाई के बाद के रख-रखाव और मार्केटिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे अपनी उपज का सही मूल्य प्राप्त कर सकें।

प्रबंधन और पारदर्शिता। 

योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए प्रशासन स्तर पर भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। एमआईडीएच के मिशन प्रबंधन घटक के तहत, राज्य और जिला स्तर पर विभिन्न गतिविधियों के बेहतरीन प्रबंधन के लिए कुल वार्षिक आवंटन का 2.5% हिस्सा सीधे राज्य बागवानी मिशन को प्रदान किया जाता है, जिससे प्रशासनिक कार्यकुशलता बनी रहती है और योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के धरातल पर उतरता है

Modern farming techniques India

निष्कर्ष। 


भारत में बागवानी और संरक्षित खेती का भविष्य बेहद उज्ज्वल है। सरकार की दूरदर्शी नीतियां, एमआईडीएच जैसी योजनाएं, और राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड व कृषि विश्वविद्यालयों का समर्थन देश के किसानों को एक नई दिशा दे रहा है।

यदि आप भी एक प्रगतिशील किसान हैं या बागवानी के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, तो सरकार की इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं। आधुनिक तकनीकों को अपनाकर न केवल फसल की पैदावार सुधारी जा सकती है, बल्कि देश के कृषि निर्यात को भी एक नई ऊंचाई दी जा सकती है।

समय आ गया है कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ इन आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया जाए, ताकि देश का किसान और मजबूत हो सके।

बेस्ट मोबाइल लेने के लिए यहां क्लिक करे 

https://link.amazon/B0jdwFHx5Click


टिप्पणियाँ