नमस्कार दोस्तों हम बात करेंगे आज कि जो लोग अवैध या कानूनी तौर पर बच्चा गोद लेते हैं कही लोग गोद के नाम पर बच्चों को ले तो जाते है लेकिन उनकी देखभाल नहीं करते उनसे गलत काम करवाते है उनके बारे मे सरकार अब क्या नियम लाई हैं
भारत में बच्चों को कानूनी और सुरक्षित तरीके से गोद लेने (Adoption) की प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने MyGov India के सहयोग से एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान शुरू किया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत आने वाली यह संस्था चाहती है कि देश के नागरिकों को बच्चों को गोद लेने के सही और कानूनी नियमों की पूरी जानकारी मिले।
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देश में अवैध और डायरेक्ट अडॉप्टशन की समस्या।
जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) अधिनियम, 2015 के तहत देश में बच्चों को गोद लेने का एक मजबूत और स्पष्ट कानूनी ढांचा मौजूद है। इसके बावजूद, देश भर से प्रत्यक्ष और अवैध गोद लेने (Direct and Illegal Adoption) के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
यह अवैध प्रक्रियाएं अक्सर असुरक्षित माध्यमों से गलत एडॉप्शन से होती।
° अस्पतालों के जरिए अनधिकृत रूप से बच्चे देना
° गैर-पंजीकृत देखभाल व्यवस्था (Unregistered Care Arrangements)
° बिचौलियों (Intermediaries) की संलिप्तता
° बच्चों को लावारिस छोड़ना और फिर उनकी अनौपचारिक कस्टडी लेना।
बच्चों को अवैध गोद लेने के गंभीर जोखिम और नुकसान।
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इस तरह के गैर-कानूनी तरीके अपनाना न केवल बच्चों के अधिकारों और कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि इसके कई बड़े नुकसान भी हैं:
1. कानूनी और नैतिक जोखिम: ऐसे मामलों में शामिल बच्चों और परिवारों दोनों को गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
2. पारदर्शिता की कमी: अवैध माध्यमों से गोद लिए गए बच्चों को औपचारिक व्यवस्था के तहत मिलने वाले कानूनी सुरक्षा कवच और पारदर्शी देखभाल से वंचित होना पड़ता है।
3. बाल अधिकारों का हनन: यह बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
CARA और सरकार के कड़े कदम।
इन अवैध प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए CARA ने अंतर-मंत्रालयी समन्वय (Inter-ministerial coordination), स्टेकहोल्डर की भागीदारी और मजबूत प्रवर्तन तंत्र (Enforcement mechanisms) के जरिए अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। सरकार का साफ मानना है कि इन कुप्रथाओं को रोकने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी बहुत जरूरी है।
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Click इस जागरूकता अभियान के मुख्य उद्देश्य
इस राष्ट्रव्यापी अभियान के प्रमुख लक्ष्य निम्नलिखित हैं।
1. व्यापक जागरूकता: देश भर में यह संदेश फैलाना कि डायरेक्ट या अवैध तरीके से बच्चों को गोद लेना गैर-कानूनी है।
2. कानूनी जानकारी देना: नागरिकों और संबंधित पक्षों को जेजे अधिनियम (JJ Act) के तहत दिए गए कानूनी प्रावधानों के बारे में शिक्षित करना।
3. जवाबदेही तय करना: अस्पतालों, पुलिस, बाल कल्याण समितियों (CWCs) और जिला अधिकारियों की जवाबदेही को मजबूत करना।
सुरक्षित सरेंडर को बढ़ावा देना: बच्चों को सुरक्षित रूप से सरेंडर करने और कानूनी रूप से गोद लेने के तंत्र (CARINGS पोर्टल) के बारे में बताना।
4. सार्वजनिक रिपोर्टिंग: यदि किसी को भी अवैध गोद लेने के संदिग्ध मामलों की जानकारी मिले, तो उसकी तुरंत रिपोर्टिंग के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना।
5. बेहतर समन्वय: विभिन्न मंत्रालयों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच आपसी तालमेल को बेहतर बनाना।
निष्कर्ष।
बच्चों का भविष्य और उनकी सुरक्षा देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यदि आप किसी बच्चे को नया जीवन देना चाहते हैं और उसे कानूनी रूप से अपने परिवार का हिस्सा बनाना चाहते हैं, तो हमेशा CARA (CARINGS) के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ही कानूनी रास्ता अपनाएं। अवैध माध्यमों से बचना न केवल कानून का सम्मान है, बल्कि एक बच्चे के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी भी है।
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