भारत की सांख्यिकी प्रणाली में डिजिटल क्रांति: जानिए कैसे बदल रहा है डेटा संकलन का पूरा तरीका

 नमस्कार दोस्तों आग हम देश की अर्थव्यवस्था, विकास दर, महंगाई या बेरोजगारी के आंकड़ों की बात करते हैं, तो हमारे मन में एक सवाल जरूर आता होगा कि आखिर ये आंकड़े आते कहां से हैं और इन्हें कौन इकट्ठा करता है? सामान्य तौर पर, इन आधिकारिक आंकड़ों को तैयार करने की जिम्मेदारी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) और उसके तहत आने वाले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की होती है। हाल ही में इस विभाग ने आंकड़ों के संकलन, गुणवत्ता और उनके सार्वजनिक प्रसार को लेकर कई क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। आज के इस लेख में हम इसी पूरी प्रक्रिया को बहुत ही सरल और सहज भाषा में समझने की कोशिश करेंगे कि कैसे भारत की सांख्यिकी प्रणाली पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक हो रही है।

MoSPI and NSO digital statistics initiatives and data modernization in India


पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर डिजिटल युग में कदम


कुर्सी पर बैठकर कागजों पर सर्वे करने और रजिस्टर भरने का दौर अब धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है। NSO ने देश की आधिकारिक सांख्यिकी प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 'कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यूइंग' (CAPI) प्रणाली का उपयोग है। इसके तहत सर्वे करने वाले अधिकारी अपने साथ ऐसे handheld उपकरणों (डिवाइस) लेकर जाते हैं जिनमें पहले से ही इनबिल्ट वेरिफिकेशन चेक (सत्यापन जांच) होती है।


इसका फायदा यह होता है कि जब मैदानी स्तर पर डेटा इकट्ठा किया जा रहा होता है, तभी उसकी शुद्धता की जांच हो जाती है। इसके अलावा, सर्वे के कामों को केंद्रीय सर्वर से जोड़ा गया है, जिससे तुरंत निगरानी रखने के लिए डैशबोर्ड मिल जाते हैं। जिन घरों या इकाइयों का सर्वे किया जाता है, उनकी जीपीएस टैगिंग (GPS Tagging) की जाती है ताकि डेटा की प्रामाणिकता पर कोई सवाल न उठ सके। इन तमाम तकनीकी सुधारों के कारण न केवल डेटा संकलन के दौरान होने वाली गलतियों में कमी आई है, बल्कि डेटा प्रोसेसिंग में लगने वाला समय भी काफी कम हो गया है


प्रशासनिक डेटासेट का सर्वे के साथ शानदार एकीकरण


पुराने समय में हर छोटी-सी जानकारी के लिए नए सिरे से लंबा सर्वे करना पड़ता था, जिसमें समय और पैसा दोनों बहुत खर्च होते थे। लेकिन अब मंत्रालय ने एक स्मार्ट तरीका निकाला है—वह है प्रशासनिक डेटासेट का सर्वे नमूनों के साथ एकीकरण (Integration of Administrative Datasets)। आइए इसे कुछ आसान उदाहरणों से समझते हैं:


°  वार्षिक सेवा क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण (SASSE): इस तरह के बड़े सर्वे के लिए अब 'जीएसटीएन (GSTN) डेटाबेस' को नमूना फ्रेम के रूप में उपयोग किया जाता है। इससे यह फायदा होता है कि असली और रजिस्टर्ड व्यवसायों का सटीक डेटा मिल जाता है।

°  असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का सर्वेक्षण: ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वर्ष 2011 की जनगणना की ग्राम निर्देशिका का उपयोग किया जाता है, जिससे जमीनी स्तर पर किसी भी हिस्से को छोड़ना नामुमकिन हो जाता है।

°  उद्योग वार्षिक सर्वेक्षण (ASI): इसमें मुख्य कारखाना निरीक्षक और अन्य वैधानिक पंजीकरण प्राधिकरणों के पास मौजूद प्रशासनिक अभिलेखों की मदद ली जाती है।

°  निजी निगम क्षेत्र के आंकड़े: कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) के डेटाबेस का उपयोग करके निजी निगम क्षेत्र के पूंजीगत व्यय निवेश से जुड़े सर्वे फ्रेम तैयार किए जाते हैं


यूएन के मानकों पर आधारित गुणवत्ता मूल्यांकन (SQAF)


डेटा केवल ज्यादा होना काफी नहीं है, डेटा की क्वालिटी यानी गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आधिकारिक सांख्यिकी में गुणवत्ता आश्वासन को मजबूत करने के लिए, मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र के राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन ढांचा (UNNQAF, 2019) पर आधारित 'सांख्यिकी गुणवत्ता मूल्यांकन ढांचा' (SQAF) विकसित किया है। यह ढांचा यह सुनिश्चित करता है कि संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक सांख्यिकी के मूलभूत सिद्धांतों (UNFPOS) का पूरी तरह से पालन हो।


आम नागरिकों छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स


पहले के समय में सरकारी आंकड़े सरकारी फाइलों या मोटी किताबों में दबे रहते थे और आम आदमी या रिसर्च करने वाले छात्रों तक उनकी पहुंच बहुत मुश्किल हुआ करती थी। लेकिन अब ऐसा बिल्कुल नहीं है। मंत्रालय ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई बेहतरीन डिजिटल दरवाजे खोल दिए हैं:


1  अग्रिम रिलीज कैलेंडर (ARC): मंत्रालय की वेबसाइट पर एक अग्रिम रिलीज कैलेंडर' उपलब्ध रहता है, जो यह पहले से ही बता देता है कि कौन सा प्रमुख सांख्यिकीय प्रकाशन किस तारीख को जारी होने वाला है।

2  ई-सांख्यिकी पोर्टल और गोइस्टेट (GolStat) ऐप: इसमें 29 सांख्यिकीय उत्पाद, 913 डेटासेट और 137 मिलियन से अधिक रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। साथ ही 'GolStat' मोबाइल ऐप से स्मार्टफोन पर आसानी से आंकड़े मिल सकते हैं।

3  माइक्रोडेटा पोर्टल: शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए 'माइक्रोडेटा पोर्टल' के माध्यम से 189 से अधिक सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षणों के अनाम इकाई-स्तरीय डेटा (Anonymised Unit-level Data) तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।


निष्कर्ष 

संक्षेप में कहें तो, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ये पहलें भारत को 'डिजिटल इंडिया' के सपने की ओर मजबूती से आगे बढ़ा रही हैं। एक तरफ जहां तकनीक के इस्तेमाल से डेटा चोरी या हेरफेर की गुंजाइश खत्म हो रही है, वहीं दूसरी तरफ शोधकर्ताओं, छात्रों और नीति निर्माताओं के लिए सटीक आंकड़े एक क्लिक पर उपलब्ध हो रहे हैं। यदि आप भी इकोनॉमिक्स, डेटा साइंस या सरकारी नीतियों के अध्ययन में रुचि रखते हैं, तो MoSPI के इन पोर्टल्स और ऐप्स का उपयोग करके अपनी रिसर्च को एक नई दिशा दे सकते हैं।



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