प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY): मछली पालकों की किस्मत बदल रही है ये FFPO योजना, जानिए पूरी बात

नमस्कार दोस्तों आज में उन लोगों की फायदे की जानकारी लाया हु जो मछली पालन का काम करते है या सोच रहे हैं तो आज हम बात करेंगे 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' और इसके तहत बनने वाले 'मछली पालक उत्पादक संगठनों' (FFPO) की।

अक्सर हमारे देश में मछुआरों और मछली पालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वे अपनी मेहनत की सही कीमत बाजार से नहीं निकाल पाते। बिचौलिए बीच में सारा मुनाफा ले जाते हैं और किसान बस देखता रह जाता है। इसी समस्या का पक्का इलाज करने के लिए भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) की शुरुआत की है। इसका सीधा सा मकसद है—मछली पालकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और बाजार में उनकी मोल-भाव करने की ताकत को बढ़ाना।


प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और मछली पालक उत्पादक संगठन (FFPO) की जानकारी


आखिर ये FFPO (मछली पालक उत्पादक संगठन)  क्या है?

जैसे किसानों के लिए FPO होते हैं, वैसे ही हमारे मछली पालकों के लिए सरकार ने FFPO (Fish Farmers Producer Organisation) बनाए हैं। आसान शब्दों में कहें तो जब बहुत सारे मछली पालक मिलकर एक अपना संगठन या कंपनी बना लेते हैं, तो सरकार उन्हें बिजनेस करने के लिए बकायदा पैसे और दूसरी मदद देती है। इससे वे अकेले नहीं बल्कि एक ग्रुप के तौर पर काम करते हैं, जिससे मछली बेचने से लेकर उसकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग तक सब आसान हो जाता है। 


बड़ा आंकड़ा जो आपको जानना चाहिए: सरकार ने पिछले पांच सालों (वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान) देश भर में कुल 2,195 FFPO बनाने के लिए 544.86 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की है। इसमें दो काम शामिल हैं—एक तो नए 195 FFPO बनाना और दूसरा, पहले से चल रही 2,000 पुरानी 'प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियों' (PFCS) को अपग्रेड करके FFPO में बदलना।


किन बड़ी एजेंसियों के जरिए चल रहा है ये काम?

सरकार इस योजना को बहुत ही सिस्टम से चला रही है। इसके लिए देश की 4 बड़ी केंद्रीय एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है:  

एनएफडीबी (NFDB): नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड  

एसएफएसी (SFAC): स्मॉल फार्मर्स एग्री-बिज़नेस कंसोर्टियम 
 
नैफेड (NAFED): भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ  

एनसीडीसी (NCDC): राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम  



इन एजेंसियों की मदद से देश में अब तक कुल 2,104 मछली पालक उत्पादक संगठन (FFPO) बनाए जा चुके हैं। हाल ही में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह जी) ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में इन सारे आंकड़ों की पूरी जानकारी देश के सामने रखी है। 

देशभर में राज्यों का क्या हाल है? (राज्य-वार स्थिति)

अगर हम पूरे देश की बात करें तो लगभग हर राज्य में इस योजना का असर देखने को मिल रहा है। आइए एक नजर डालते हैं कि किस राज्य में कितने नए और पुराने संगठनों को मिलाकर काम हुआ है

राज्य / केंद्र शासित।  FFPO (2021-22 से)।   सहकारी समितियों। 

आंध्र प्रदेश।              10                                  182

असम।                    16                                   160

बिहार।                    13                                    35

छत्तीसगढ़।               9                                      47

गुजरात।                  6                                      119


झारखंड।                 1                                      27
कर्नाटक।                 4                                      62
केरल।                     4                                     123
मध्य प्रदेश।             15                                     92
महाराष्ट्र।                  7                                      254
मणिपुर।                 13                                     135
ओडिशा।                 9                                      21
तमिलनाडु।              8                                      105
तेलंगाना।                 7                                       238
त्रिपुरा।                    17                                    105
उत्तर प्रदेश।               21                                     54
उत्तराखंड।               7                                     25
पश्चिम बंगाल           1                                      40
कुल योग (अन्य राज्यों सहित)  195                     1909


आंध्र प्रदेश में इसका सबसे ज्यादा असर क्यों दिख रहा है?


अगर हम किसी एक राज्य का उदाहरण लें जहाँ इस पर बहुत बेहतरीन काम हुआ है, तो वह आंध्र प्रदेश है। अकेले आंध्र प्रदेश में सरकार ने 328.20 लाख रुपये की सहायता देकर 10 नए FFPO बनाए और पंजीकृत किए हैं। इन नए संगठनों में इनक्यूबेशन, मैनेजमेंट और इक्विटी ग्रांट जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। 


इतना ही नहीं, वहाँ 963.73 लाख रुपये के निवेश से 182 पुरानी प्राइमरी फिशरीज कोऑपरेटिव सोसायटियों को भी FFPO के रूप में बदल दिया गया है। अकेले कोनासीमा जिले में ही 34 ऐसी समितियों को अपग्रेड किया गया है। इन सभी संगठनों से आज के समय में करीब 39,022 सदस्य जुड़कर अपना रोजगार चला रहे हैं और बेहतर कमाई कर रहे हैं। 


इससे आम मछली पालक को क्या फायदा है?

शायद तुम्हारे मन में सवाल आ रहा होगा कि इससे एक आम मछली वाले को क्या लाभ मिलेगा? तो सुनो दोस्त, इसके जरिए



1.  मछली पालकों को बाजार में अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म मिलता है।  

2.   सूखी मछली की बिक्री, फिश बर्गर बनाने, अचार बनाने और झींगा प्रोसेसिंग जैसी आधुनिक यूनिट लगाने में मदद मिलती है।  

3.   सरकार की तरफ से ट्रेनिंग, जागरूकता कार्यक्रम और वित्तीय अनुदान सीधे इन संगठनों के खातों में आते हैं। 


निष्कर्ष।  

अगर तुम या तुम्हारे जान पहचान का कोई व्यक्ति मछली पालन के व्यवसाय से जुड़ा है, तो उसे सरकार की इन योजनाओं के बारे में जरूर बताना चाहिए। सही जानकारी और ऐसे संगठनों से जुड़कर खेती-किसानी और पशुपालन-मछली पालन की तस्वीर पूरी तरह बदली जा सकती है। अगर इस योजना से जुड़ा कोई और सवाल तुम्हारे मन में हो, तो बेझिझक नीचे कमेंट करके पूछ सकते हो!



डिस्क्लेमर।  


हमारे इस ब्लॉग पर दी गई जानकारी पूरी तरह से पत्र सूचना कार्यालय (PIB) और सरकार द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों तथा आंकड़ों पर आधारित है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक केवल सटीक और उपयोगी सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना है। किसी भी योजना में आवेदन करने या निवेश करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित विभाग से पुष्टि अवश्य कर लें।


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