नमस्कार दोस्तों हम कभी उन रंग बिरंगी मछली को देखते हैं और उनको चुने के लिए हाथ में लेने के लिए उत्साह होते हैं लेकिन आपने कभी सोचा है ये कहा से आती है और देश की अर्थव्यवस्था में क्या फायदा होता हैं।
भारत सरकार ने इसी सेक्टर को एक नई दिशा देने के लिए "मिशन रंगीन मछली 2031" (Mission Rangin Machli 2031) नाम से एक बहुत बड़ी रणनीतिक कार्ययोजना की शुरुआत की है। उपराष्ट्रपति द्वारा जारी यह मिशन देश के द्वीपीय संसाधनों और तटीय इलाकों की तकदीर बदलने वाला है।
आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि यह मिशन क्या है, इससे आपको, आम जनता को और देश को क्या-क्या फायदे मिलने वाले हैं।
क्या है यह मिशन रंगीन मछली 2031
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भारत के पास करीब 11,099 किलोमीटर लंबी तटरेखा और विशाल समुद्री क्षेत्र है, लेकिन अब तक इस क्षेत्र की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाया था।
लक्षद्वीप जैसे द्वीप समूह समुद्री खजानों से भरे पड़े हैं। सरकार चाहती है कि इन द्वीपों और तटीय इलाकों में वैज्ञानिक तरीके से सजावटी मछलियों को पाला जाए, उनकी अच्छी देखरेख हो और फिर उन्हें देश-विदेश में बेचा जाए। इसके लिए ब्रीडिंग (प्रजनन), पानी की गुणवत्ता, मछली के स्वास्थ्य और उनके ट्रांसपोर्टेशन के लिए पक्के नियम और मानक तय किए जा रहे हैं ताकि पूरी प्रक्रिया सुरक्षित और आसान हो सके।
आम जनता और मछली पालकों को इससे क्या फायदा होगा
जब भी सरकार कोई नया मिशन लाती है तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इसमें हमारे लिए क्या है आइए इसे पॉइंट-टू-पॉइंट समझते हैं
रोजगार के नए अवसर: इस मिशन के आने से गांवों और तटीय इलाकों में युवाओं के लिए नौकरियों के नए दरवाजे खुलेंगे। जो लोग मछली पालन से जुड़ना चाहते हैं, उन्हें सरकार की तरफ से सही ट्रेनिंग और तकनीक मिलेगी।
महिला सशक्तिकरण: इस सेक्टर की खास बात यह है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी बहुत तेजी से बढ़ रही है। महिला मछली पालक घर के पास ही रहकर छोटे स्तर पर एक्वेरियम फिश ब्रीडिंग का काम शुरू करके अपनी आमदनी बढ़ा सकती हैं।
कम लागत में ज्यादा मुनाफा: अगर आप घर पर या छोटे फार्म में रंगीन मछलियाँ पालने का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो सरकार के इस प्लान से आपको सही तकनीक और बाजार तक सीधी पहुँच मिलेगी। इससे कम जगह और कम निवेश में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
बेहतर मार्गदर्शन और सुरक्षा: पहले लोगों को यह नहीं पता होता था कि मछलियों की बीमारी से कैसे बचें या उन्हें एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षित कैसे ले जाएं। इस मिशन के तहत एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर) बनने से हर छोटी-बड़ी बात का रास्ता साफ हो जाएगा।
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Click क्या इस पर कोई टैक्स लगेगा किस प्रकार का टैक्स रहेगा
यह सबसे अहम सवाल है जो हर आम इंसान और बिजनेस करने वाले के मन में आता है।
क्या कोई नया टैक्स लगेगा
इस मिशन के तहत सरकार आम जनता या छोटे मछली पालकों पर कोई नया या अतिरिक्त टैक्स नहीं लगा रही है। बल्कि सरकार का उद्देश्य इस बिजनेस को आसान बनाना है।
टैक्स और वित्तीय व्यवस्था का स्वरूप
भारत में कृषि, मत्स्य पालन और इससे जुड़े जलीय कृषि (Aquaculture) के कामों को आम तौर पर इनकम टैक्स के दायरे से छूट मिली होती है या उन पर बेहद न्यूनतम कर नियम लागू होते हैं। इस मिशन का मकसद टैक्स वसूलना नहीं, बल्कि मछलियों के व्यापार को बढ़ावा देना, निर्यात (Export) को बढ़ाना और किसानों की आय को दोगुना करना है।
यदि आप कोई बड़ा कमर्शियल बिजनेस या कंपनी रजिस्टर्ड करते हैं, तो उस पर सामान्य कॉर्पोरेट या जीएसटी नियम लागू होंगे, जो कि किसी भी सामान्य व्यापार पर होते हैं। छोटे पालकों और स्थानीय मछुआरों के लिए यह पूरी तरह से आजीविका और प्रोत्साहन पर केंद्रित है।
इस मिशन से देश को क्या फायदा होगा
देश के दृष्टिकोण से देखें तो यह मिशन भारत की 'नीली अर्थव्यवस्था' (Blue Economy) को एक नई उड़ान देगा।
1 विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) की कमाई: भारत से जब ये सुंदर सजावटी मछलियाँ विदेशों में एक्सपोर्ट होंगी, तो देश में विदेशी मुद्रा आएगी। इससे हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
2 समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Marine Ecosystem) का संतुलन: इस मिशन में इस बात का खास ध्यान रखा गया है कि मछलियों का व्यापार करते समय समुद्र और पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुँचे। वैज्ञानिक तरीकों से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्राकृतिक स्रोतों को बिना नुकसान पहुँचाए उनका सतत (Sustainable) उपयोग हो।
3 ग्लोबल मार्केट में पहचान: अभी तक कई देशों में सजावटी मछलियों के बाजार में दूसरे देशों का दबदबा है। इस कार्ययोजना के तहत क्वालिटी एश्योरेंस और ट्रेसेबिलिटी बेहतर होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय मछलियों की मांग तेजी से बढ़ेगी।
मछलियों का क्या मूल्य रहेगा।
अगर बात बाजार में मछलियों की कीमत की करें, तो यह पूरी तरह से उनकी प्रजाति, रंग, आकार और दुर्लभता पर निर्भर करती है
घरेलू बाजार में: आम प्रजाति की रंगीन मछलियाँ (जैसे गुप्पी, मोली, गोल्डफिश) बहुत ही सस्ते दामों (लगभग 20 रुपये से लेकर 100 रुपये प्रति जोड़ा) में आसानी से मिल जाती हैं, जिन्हें आम लोग अपने घरों के छोटे एक्वेरियम में रख सकते हैं।
विदेशी और दुर्लभ प्रजातियाँ: कुछ खास और हाई-एंड इम्पोर्टेड या विशेष ब्रीड की मछलियाँ हजारों रुपये तक की भी बिकती हैं।
व्यापारिक मूल्य: जब किसान या पालक थोक (Wholesale) में इन मछलियों को एक्सपोर्टर्स या दुकानदारों को बेचते हैं, तो उन्हें ग्रेडिंग के हिसाब से अच्छी और वाजिब कीमत मिलती है। सरकार की कोशिश यही है कि बिचौलियों का खेल खत्म हो और सीधा मुनाफा पालकों तक पहुँचे।
निष्कर्ष
"मिशन रंगीन मछली 2031" केवल कुछ कागजी योजनाओं का पुलिंदा नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं और तटीय इलाकों के बाशिंदों के लिए एक सुनहरा मौका है जो अपनी मेहनत से कुछ नया करना चाहते हैं। इसमें न तो कोई भारी-भरकम टैक्स का बोझ है और न ही कोई जटिल प्रक्रिया।
यदि आप भी फिश फार्मिंग, पेट केयर या एक्वेरियम के बिजनेस में रुचि रखते हैं, तो आने वाले सालों में सरकार की इस योजना से आपको बहुत मदद मिलने वाली है। यह शौक भी है, रोजगार भी है और देश की तरक्की का एक नया जरिया भी!
इस मिशन के बारे में आपका क्या सोचना है? क्या आप भी कभी अपने घर में एक्वेरियम रखना चाहेंगे? हमें जरूर बताएं।
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